वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक दबाव के इस दौर में, जब आईटी स्टॉक्स मुश्किल हालात से गुजर रहे थे, भारत की IT दिग्गज कंपनी इन्फोसिस ने निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर दी है। कंपनी ने एक दशक में अपना सबसे बड़ा शेयर बायबैक (Share Buyback) कार्यक्रम घोषित किया है, जिसका आकार है ₹18,000 करोड़। यह कदम न केवल इन्फोसिस के शेयरधारकों के लिए, बल्कि पूरे बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
इस लेख में, हम इन्फोसिस के इस बड़े फैसले को विस्तार से समझेंगे, साथ ही भारत में हुए कुछ अन्य बड़े बायबैक्स पर भी नज़र डालेंगे और जानेंगे कि आखिर कंपनियाँ शेयर बायबैक करती क्यों हैं।
इन्फोसिस के बायबैक की मुख्य बातें
-
बायबैक का आकार: ₹18,000 करोड़
-
शेयरों की संख्या: 10 करोड़ (100 मिलियन) शेयर
-
बायबैक कीमत: ₹1,800 प्रति शेयर
-
प्रीमियम: यह कीमत कंपनी के घोषणा से पहले वाले दिन (गुरुवार) के बंद भाव ₹1,509.50 से लगभग 19.3% अधिक है।
-
हिस्सेदारी: यह बायबैक कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी का 2.41% हिस्सा होगा।
यह इन्फोसिस का पिछले 10 सालों में पाँचवाँ बायबैक है। इससे पहले, 2022 में कंपनी ने ₹9,300 करोड़ खर्च करके 6 करोड़ शेयरों को ₹1,850 प्रति शेयर के भाव से खरीदा था।
भारतीय कंपनियों के सबसे बड़े बायबैक्स: एक नज़र
इन्फोसिस इस मामले में अकेली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारत की कई प्रमुख कंपनियों ने शेयर बायबैक के जरिए अपने शेयरधारकों को लाभ पहुँचाया है और अपनी वित्तीय मजबूती का परिचय दिया है।
1. TCS: बायबैक की दुनिया का बादशाह
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने शेयर बायबैक के मामले में सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। 2022 में, कंपनी ने ₹18,000 करोड़ के बायबैक की घोषणा की थी, जिसमें शेयरों की कीमत ₹4,500 प्रति शेयर रखी गई थी। पिछले एक दशक में TCS ने cumulatively ₹40,000 करोड़ से अधिक के बायबैक किए हैं। कंपनी लगातार इस टूल का इस्तेमाल शेयरधारकों को पूंजी वापस करने, इक्विटी पर रिटर्न (ROE) बढ़ाने और शेयर के प्रदर्शन को मजबूती देने के लिए करती आई है।
2. Bajaj Auto: सरप्लस कैश का बेहतरीन इस्तेमाल
मार्च 2024 में, Bajaj Auto ने साल के सबसे बड़े बायबैक्स में से एक ₹10,000 करोड़ के बायबैक को अंजाम दिया। कंपनी ने शेयरों को ₹10,000 प्रति शेयर के भाव से खरीदा, जो उस समय के बाजार भाव से 43% का भारी-भरकम प्रीमियम था। इसका मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त नकदी (सरप्लस कैश) का सदुपयोग, इक्विटी को मजबूत करना और प्रति शेयर आय (EPS) को बढ़ावा देना था।
3. Wipro: ₹12,000 करोड़ की पूंजी वापसी
2023 में, विप्रो ने ₹12,000 करोड़ के बायबैक कार्यक्रम को पूरा किया, जिसमें प्रति शेयर कीमत ₹445 थी। कंपनी ने इस अभ्यास को अपनी ‘कैपिटल अलोकेशन स्ट्रैटेजी’ (पूंजी आवंटन रणनीति) के एक हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे EPS में सुधार हुआ और वित्तीय अनुपात मजबूत हुए।
4. Bajaj Consumer Care: लगातार दूसरा बायबैक
Bajaj Consumer Care ने लगातार दूसरे साल बायबैक की घोषणा करके अपने शेयरधारकों पर विश्वास जताया। कंपनी ने 6.43 मिलियन शेयर, जो उसकी इक्विटी का 4.69% है, को ₹290 प्रति शेयर (बाजार भाव से 18% प्रीमियम) पर खरीदने की योजना बनाई। इससे पहले 2024 में, कंपनी ने ₹166 करोड़ के बायबैक को पूरा किया था।
अन्य उद्योगों में बायबैक की लहर
-
टेलीकॉम: Indus Towers ने अगस्त 2024 में ₹2,640 करोड़ के बायबैक की घोषणा की, जिसका उद्देश्य बढ़ते टेलीकॉम निवेश के बीच शेयरधारकों को इनाम देना था।
-
फार्मा: Aurobindo Pharma ने 2024 में ₹750 करोड़ का बायबेक पूरा किया। इसी तरह, Zydus Lifesciences ने भी मार्च 2024 में ₹600 करोड़ के बायबैक के जरिए अपनी दवाओं के पाइपलाइन पर भरोसा जताया।
-
उर्वरक: Chambal Fertilisers & Chemicals ने जनवरी 2024 में अपने उर्वरक व्यवसाय से मिले अतिरिक्त कैश flow का इस्तेमाल करते हुए ₹700 करोड़ के बायबैक की घोषणा की।
आखिर क्यों करती हैं कंपनियाँ शेयर बायबैक? (शेयर बायबैक के फायदे)
शेयर बायबैक सिर्फ शेयरधारकों को पैसा लौटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी कॉर्पोरेट रणनीति है।
-
शेयरधारकों को मूल्यवर्धन (Value Creation): बायबैक कीमत हमेशा मौजूदा बाजार भाव से ऊपर (प्रीमियम पर) होती है, जिससे सीधे तौर पर शेयरधारकों को फायदा होता है।
-
प्रति शेयर आय (EPS) में बढ़ोतरी: जब कंपनी अपने ही शेयर खरीदकर उन्हें रद्द कर देती है, तो बाजार में शेयरों की कुल संख्या (Outstanding Shares) कम हो जाती है। नतीजतन, कंपनी की कमाई को कम शेयरों में बाँटा जाता है, जिससे EPS बढ़ जाती है। EPS का बढ़ना कंपनी की लाभकारिता का एक अहम संकेतक माना जाता है।
-
शेयर की कीमत में सपोर्ट: बायबैक की घोषणा से बाजार में सकारात्मकता आती है और कंपनी की मजबूती का संकेत मिलता है, जो शेयर की कीमत को सहारा देने का काम करता है, खासकर मंदी के दौर में।
-
अतिरिक्त नकदी का कुशल इस्तेमाल: जब कंपनी के पास निवेश के लिए तुरंत कोई नया अवसर नहीं होता, तो वह अपने पास जमा अतिरिक्त नकदी (सरप्लस कैश) को शेयरधारकों को लौटाकर उसका कुशल इस्तेमाल करती है।
-
आत्मविश्वास का प्रदर्शन: बायबैक की घोषणा कंपनी के प्रबंधन के अपने भविष्य के प्रदर्शन और negrowth को लेकर आत्मविश्वास को दर्शाती है। यह एक संकेत है कि प्रबंधन का मानना है कि कंपनी का शेयर अंडरवैल्यूड है।
निष्कर्ष
इन्फोसिस का ₹18,000 करोड़ का बायबैक न केवल एक वित्तीय लेन-देन है, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश है जो बाजार में अस्थिरता के इस दौर में विश्वास पैदा करता है। TCS, Bajaj Auto, Wipro, और अन्य कंपनियों के बायबैक्स यह साबित करते हैं कि भारत की अग्रणी कंपनियाँ न केवल मुनाफा कमा रही हैं, बल्कि अपने शेयरधारकों के धन का सर्वोत्तम इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। शेयर बायबैक एक शक्तिशाली टूल के रूप में उभरा है, जिसके जरिए कंपनियाँ विकास, तरलता और निवेशकों के विश्वास के बीच एक सही संतुलन बनाए रखती हैं। निवेशकों के लिए, किसी कंपनी द्वारा बायबैक की घोषणा उसकी वित्तीय सेहत और प्रबंधन के आत्मविश्वास का एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।